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who created god?

jai shreeman-narayan! In his commentary of chhandogya-upansihad shree madhvacharya ji says god vishnu by using two words they are :  1. Swa 2. Swara  Swa means the self , so vishnu the supreme of all was called swa because he himself is the reason of every creation. so everyone who ask who created god the answer is here that is swa (self). god himself created himself , there is no other reason for his existence. shree hari vishnu is due to himself. also in brahma-samhita lord brahma (one who is assigned with the work of creation by  vishnu)   says a word " sarva karan karanam" which means reason for all the reasons. Swara word is consist of two letters of sanskrit they are SWA and RA , swa means self and ra means indulged.  one who is indulged in himself is called as swara. he is also the reason for his own pleasure and he is in indulged in it. a new age poet of most prominent hindu book tulsidas in his most prominent book ramcharitmanas says 'soi na janahu...

मृग मरीचिका: संविधान

 "मेरी रैली में मेरे सामने लोग नारे लगा रहे थे भारत माता की जय मैंने सोचा यह किसकी जय हो रही है इसका निष्कर्ष यह निकला कि भारत के निवासी हैं, जो लोग हैं इनकी ही जय भारत माता की जय है", यह शब्द मेरे नहीं भारत की खोज पुस्तक में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लिखा है।  १५ अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली फिर 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ संविधान अर्थात नियम और नियम अर्थात जो स्वतंत्रता में बाधक हो । जो देश स्वतंत्र हैं उनके पास अपना संविधान है नियम है जिनके पास अपने नियम नहीं वह समझो स्वतंत्र है ही नहीं तो फिर सामान्य प्रश्न है कि यदि हम नियम में हैं तो स्वतंत्रता कैसी और यदि हम स्वतंत्र है तो नियम क्यों? इधर स्वतंत्र हुए नहीं उधर नियम आ गए हमें अपने अनुसार चलाने के लिए नियम कहते हैं यह मत करो वह मत करो फिर स्वतंत्रता का लाभ क्या हुआ? एक शिशु का जन्म हुआ तो वह बिल्कुल स्वतंत्र होता है कोई नियम नहीं लगता,  ना सोने का न जागने का, ना  भोजन का ना शौच का कोई नियम नहीं। सब कुछ उसकी इच्छा पर है।  शिशु स्वतंत्र है किंतु जैसे ही बड़ा हुआ नियम लग गए जब उसे बोलने आया तो नियम क्या ब...
  गज गिरा¸ मरा¸ पिलवान गिरा¸ हय कटकर गिरा¸ निशान गिरा। कोई लड़ता उत्तान गिरा¸ कोई लड़कर बलवान गिरा॥   आँखों में भाला भोंक दिया लिपटे अन्धे जन अन्धों से। सिर कटकर भू पर लोट लोट लड़ गये कबन्ध कबन्धों से॥     राणा प्रताप का ताप तचा¸ अरि–दल में हाहाकर मचा। भेड़ों की तरह भगे कहते अल्लाह हमारी जान बचा॥   अपनी नंगी तलवारों से वे आग रहे हैं उगल कहाँ। वे कहाँ शेर की तरह लड़ें¸ हम दीन सिपाही मुगल कहाँ॥॥   भयभीत परस्पर कहते थे साहस के साथ भगो वीरो! पीछे न फिरो¸ न मुड़ो¸ न कभी अकबर के हाथ लगो वीरो॥     पहले सरिता को देख डरे¸ फिर कूद–कूद उस पार भगे। कितने बह–बह इस पार लगे¸ कितने बहकर उस पार लगे॥   मंझधार तैरते थे कितने¸ कितने जल पी–पी ऊब मरे। लहरों के कोड़े खा–खाकर कितने पानी में डूब मरे॥   राणा–दल की ललकार देख¸ अपनी सेना की हार देख। सातंक चकित रह गया मान¸ राणा प्रताप के वार देख॥   व्याकुल होकर वह बोल उठा "लौटो लौटो न भगो भागो। मेवाड़ उड़ा दो तोप लगा ठहरो–ठ...

मकर संक्रान्ति

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महाभारत काल में सूर्य की जिस स्थिति का प्रतीक्षा करते हुए पितामह भीष्म ने अनेक दिनों तक बाण  शैय्या पर पड़े रहे और घोर कष्टों को  सहते रहे |पुत्र प्राप्ति के लिए माता यशोदा ने  उत्तरायण  व्रत  किया था | भगवान राम के पूर्वज राजा भगीरथी ने गंगा को पृथ्वी उतारने के लिए उत्तरायण में  देवाधिदेव भगवान पिनाकी शिव जी की तपस्या की थी गंगा के जल के कारण सगर के ६०००० वंशज मुक्त हुए  और इसी कारण संगम  स्नान करने की मान्यता  है |  गीता में स्वयं श्री भगवान ने कहा है कि उत्तरायण के मार्ग से गए हुए व्यक्ति की सद्गति  ही होती है  | आज से ६ माह तक सूर्यदेव उत्तरायण  में रहेंगे इस समय में | पृथ्वी पर  शुभता  बढ़ जाती  है|   काशी से प्रकाशित पंचांग के आधार पर सूर्य की मकर राशि में संक्रांति रात में होने के कारण संक्रांति का पुण्यकाल अगले दिन 15 जनवरी दिन शनिवार को 40 घटी यानी 16 घण्टे तक मानी जाएगी अर्थात संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी 2022 दिन शनिवार को दिन में 12 बजकर 34 मिनट तक माना जायेगा और खिचड़ी का प्र...